Tuesday, January 1, 2013

हे, परमपिता परमेश्वर

हे, परमपिता परमेश्वर
रक्षा करना तुम मेरी, ईश्वर
जो जीवन किया है मुझे प्रदान
उम्मीद थी,
लिखा न होगा तुमने यह विधान
श्रृष्टि के सृजन पर,
समानता की प्रतिक थी अर्धनारी
फिर क्यूँ यह जानते भी,
पुरुष प्रधान है दुनिया सारी
हे, परमपिता परमेश्वर
रक्षा करना तुम मेरी, ईश्वर
जो बनते ढाल, कवच और रक्षक,
प्रहरी क्या बनेगें
वही बन गए है भक्षक
कार्यरत, घर से जब मैं निकलती हूँ
कभी अपनी आहट से,
कभी परछाई,
कभी आप से ही डरती हूँ
हे, परमपिता परमेश्वर
रक्षा करना तुम मेरी, ईश्वर
रास्तों पर भीड़ संग जब चलती हूँ
कभी तीक्ष्ण नज़रों से,
कभी अशिष्ट बातों को,
सुनकर अनसुना मैं करती हूँ
इस घृणित कृत से कैसे बचूं मैं,
कब तक अन्याय और सहूँ मैं ,
किससे से अपनी बात कहूं मैं
प्रति दिन होती हूँ कई बार मैं लज्जित
रह गयी हूँ, निराश्रय, हताश और असुरक्षित
हे, परमपिता परमेश्वर
रक्षा करना तुम मेरी, ईश्वर

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